Pages

Monday, November 13, 2017

ये मोह मोह के धागे : दम लगाके हैशा

कुछ फिल्में बड़ी ही स्मूथ, स्वीट, सादगीपूर्ण और सौम्य होती हैं। ये फिल्में भले ही बॉक्स ऑफिस पर कोई बड़ा धमाल नहीं करतीं लेकिन जो भी इन्हें देखता है काफी दिनों तक इसके सादगीपूर्ण सम्मोहन से उबर नहीं पता। भारत में ऐसी फिल्मों का एक बड़ा ही समृद्ध इतिहास रहा है। ऋषिकेश मुखर्जी बड़े मास्टर थे इस काम के।
लेकिन हम तत्काल बात कर रहे हैं सन् 2015 में आई फ़िल्म "दम लगाके हैशा" की। वरुण ग्रोवर लिखित और पापॉन तथा मनाली ठाकुर द्वारा गाया हुआ शानदार गीत "ये मोह मोह के धागे, का जादू आज भी कायम है। यह गाना इसी फिल्म का है। आश्चर्यजनक रूप से इस गाने की धुन अनु मलिक ने बनाई है। हम बस दुआ ही कर सकते हैं कि उनका यह गाना कहीं से कॉपी मारा हुआ ना हो! फ़िल्म का शानदार बैकग्राउण्ड संगीत कंपोज किया है इटालियन कंपोजर Andrea Guerra ने। शरद कटारिया लिखित निर्देशित यह फ़िल्म बड़े ही सौम्य ढंग से बेमेल अरेंज मैरेज की कहानी कहती है। फ़िल्म ज़्यादा कौप्लिकेशन में नहीं जाती बल्कि कह सकतें हैं कि सतह पर ही तैरती हुई भारतीय सिनेमा की "महान" कमाऊ परंपरा "Happy Ending" की तरफ निकल जाती है। 
इस फ़िल्म के लिए अभिनेत्री भूमि पेडनेकर को काफी सराहना भी मिली थी; जो कि निश्चित रूप से मिलनी भी चाहिए क्योंकि भूमि बड़ी सफाई से मायानगरी में व्याप्त अभिनेत्रियों के बेबी डॉल इमेज को तोड़ती हैं। यहां हॉट, सेक्सी, गुड़ लुकिंग और तथाकथित होरो के हाथ का एक खिलौना और गुड़िया टाइप इमेज से परे जाकर चरित्र में ढलती है। भरोसा नहीं इनकी बाकी की दो फ़िल्में भी देख लीजिए। इस फ़िल्म के लिए भूमि को Best Female Debut का सम्मान भी मिल चुका है।
फ़िल्म देख लिया है तो बहुत खूब; नहीं देखा तो ज़रूर देखिए।

No comments:

Post a Comment